Meri Punjabi Kavita

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1.मिल जाते हैं अक्सर | 

Mil Jaate Hain Aksar 




मिल जाते हैं अक्सर,

गली, सड़क, मोड़ किनारे,

मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे,

नहीं मिलता तो,

एक प्यार से भरा दिल,

हो जिसका  सिद्धांत,

मानवता की पूजा,

जिसने पहना हो,

आभूषण नम्रता का,

जो हो प्यार से भरपूर,

जो हो एक के साथ इकमिक,

बोले बोल शहद से मीठे,

जो खाये हक़ हलाल की कमाई,

शांति का हो जो पुंज,

जिसके सीने से फूटें दरिया,

महानता के,

समदृष्टि के,

अपनेपन  के।




2. जो 'सत्य' का धारक | 

Jo Satya Ka Dharak



जो 'सत्य' का धारक,

वो स्वच्छता  का भी धारक,

उच्च - स्वच्छ,

मिथ्यात्व से परे,

बनावट के बिना,

एक अनोखा जीव,

लगे न जैसे पृथ्वी का,

आसमान से ऊँचा ,

समुद्र से गहरा,

न किसी के तुल्य,

सभी में रहता है,

सभी के विपरीत,

अल्बेला - अजीब,

लेकिन 'सत्य' का धारक,

स्वच्छता  का धारक,





3.  मुक्त हूँ | 

Mukt Hoon 


मुक्त हूँ, मैं मुक्त हूँ।  

न बंधनों से संयुक्त हूँ।  

हैं, कुछ जिम्मेदारियां,

उनसे तो मैं युक्त हूँ। 

पर मैं विमुक्त हूँ।  


मुक्त हूँ, मैं मुक्त हूँ।  



4.  Tu Hubhu  Hai |

      तूँ हूबहू है


तस्वीर में सूरत तेरी, कि तस्वीर भी तू है।

मैं जिधर देखता हूँ, बस तूँ ही हूबहू है।

कोई आस नहीं बाकी, न कोई है तमन्ना।

दीदार की तलब है, तेरे साथ की जुस्तजू है।

ढूंढता था कभी मैं, तुझको यहाँ - वहां,

नावाकिफ़ था दीवाना, कि  तू रूबरू है।

ज़िन्दगी का फ़साना, ज़िन्दगी की कहानी।

कि तू मेरी ज़िन्दगी, तू मेरे लू - लू है।

जरा दूर बैठ यार, थोड़ा सा खिसक ले।

मैं नहा कर हूँ आया, तेरे आस्तीन में बू है।








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